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Monday, February 20, 2017

बेटी के जन्‍म पर बिना शर्त आपको 11 हजार रुपए मिलेगा।




स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी ऑक्सी हेल्थकेयर ने देश भर में कहीं भी जन्म लेने वाली बच्चियों के खाते में जन्म के समय ही 11 हजार रपये जमा कराने की घोषणा की है.
बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए सरकार की तरफ से उन्‍हें शिक्षा समेत कई क्षेत्रों में प्रोत्‍साहन दिया जाता है। कुछ गैरसरकारी संस्‍थाएं भी बेटियों को बढ़ाने और उन्‍हें पढ़ाने के लिए काम करती हैं। आज हम आपको एक ऐसी हेल्‍थकेयर कंपनी के बारे में बता रहे हैं, जो बेटी के जन्‍म पर बिना शर्त आपको 11 हजार रुपए देती है।
ऑक्‍सी हेल्‍थकेयर नाम की इस कंपनी ने पिछले साल सितंबर में ही गर्ल डेवलपमेंट प्रोग्राम शुरू किया है। इसके तहत यह कंपनी भारत में पैदा होने वाली हर बेटी को 11 हजार रुपए देती है। भारत में सस्‍ती हेल्‍थकेयर सर्विस मुहैया कराने में जुटी है।




 कंपनी ने एक बयान जारी कर बताया कि रियो ओलंपिक में महिलाओं के शानदार प्रदर्शन से उत्साहित होकर कंपनी ने ‘ऑक्सी गर्ल डेवलपमेंट प्रोग्राम’ शुरू किया है. ऑक्सी हेल्थकेयर की संह संस्थापक शीतल कपूर ने कहा, ‘‘ऑक्सी ने देश की नयी पीढ़ी के सर्वांगीण स्वास्थ्य का दृष्टिकोण बनाया है. वह महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ ही उन्हें पुरुषों के बराबर ही उचित सम्मान दिलाने के लिए प्रयासरत है. रियो ओलंपिक में रजत एवं कांस्य पदक जीतने के बाद कंपनी देश में जन्म लेने वाली प्रत्येक लड़की को सोना जीतने में मदद करना चाहती है.’’ कंपनी ने ‘ऑक्सी गर्ल डेवलपमेंट प्रोग्राम’ के तहत हर साल के लिए 1,000 करोड़ रुपये का बजट तय किया है

क्या है योजना?

ऑक्सी के डायरेक्टर पंकज गुप्ता के मुताबिक उनकी कंपनी देश में पैदा होने वाली बेटियों के नाम पर सेविंग्स अकाउंट्स खुलवाएगी। उन अकाउंट्स में बच्चियों के नाम पर 11000 रुपए का फिक्स्ड डिपॉजिट करवाया जाएगा, जिसे बच्चियां 18 साल की हो जाने पर निकाल सकेंगीं। ऑक्सी की ये योजना बिल्कुल मुफ्त है, जिसका लाभ देश की बच्चियों को मिलेगा। 



पंकड कपूर के मुताबिक इस योजना में बच्ची के पिता को एक पैसे भी नहीं देने होंगे और पूरा फंड ऑक्सी देगी। उन्होंने कहा कि ऑक्सी की इस गर्ल डिवेलपमेंट प्रोग्राम का लाभ सभी गर्भवती महिलाओं को मिलेगा। इस योजना के लिए बस हर गर्भवती महिला को अपना नाम रजिस्टर्ड करवाना होगा। उन्होंने बताया कि अट्ठारह साल पूरा करने के बाद लड़की अपने खाते से यह रकम निकाल सकेगी. लड़की के धन आहरण करने के बाद वह अपनी मर्जी से इसका उपयोग शिक्षा, व्यवसाय अथवा विवाह में कर सकेगी.
मां बनने वाली महिला को ऑक्सी गर्ल डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत अपना पंजीकरण कराना होगा. एक अनुमान के मुताबिक देश में प्रतिदिन करीब 50,000 बच्चे जन्म लेते हैं. गुप्ता ने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि हम इस कार्यक्रम के तहत रोजाना करीब 5,000 महिलाओं का पंजीकरण करेंगे. लड़की पैदा होने पर हम बैंक में उनका बचत खाता खुलवाकर उसके नाम पर 11,000 रुपये जमा करेंगे. जिसे वह 18 साल पूरा होने पर निकाल सकेगी.’’



उन्होंने बताया कि इसके अलावा कंपनी पंजीकरण कराने के बाद महिलाओं के स्वास्थ्य की नियमित जांच करेगी. उन्होंने कहा कि हम देश में पैदा होने वाली सभी लड़कियों और प्रसव के बाद महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवायें उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं. इस तरह के प्रयास से देश में लड़कियों की मृत्युदर में भी कमी आएगी.
 

उल्लेखनीय है कि ऑक्सी पिछले तीन साल से स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में काम कर रही है. कंपनी ने देश के 110 शहरों में एक ही दिन में लगाये गये कुल 520 मुफ्त स्वास्थ्य जांच शिविरों में 10 लाख लोगों की मुफ्त स्वास्थ्य जांच की है. कंपनी अभी तक ढेड़ करोड़ लोगों की मुफ्त स्वास्थ्य जांच कर चुकी है.









 

बेटी के जन्‍म पर बिना शर्त आपको 11 हजार रुपए...

Read more at: http://money.bhaskar.com/news/MON-INDU-COMP-oxxy-gives-11k-without-terms-and-condition-to-every-new-born-girl-in-india-busin-55301.html?ref=cppst
बेटी के जन्‍म पर बिना शर्त आपको 11 हजार रुपए...

Read more at: http://money.bhaskar.com/news/MON-INDU-COMP-oxxy-gives-11k-without-terms-and-condition-to-every-new-born-girl-in-india-busin-55301.html?ref=cppst

Monday, May 25, 2015

क्या आप जानते हैं Google के बारे में ये 9 रोचक फैक्ट्स?



 गूगल की दो दिन की I/O कॉन्फ्रेंस 28 मई से शुरू होने जा रही है। गूगल की तरफ से इस कॉन्फ्रेंस में एंड्रॉइड 6.0 की घोषणा हो सकती है। इसके अलावा, खबरों की मानें तो गूगल एक नई फोटो शेयरिंग सर्विस पेश कर सकती है। ये गूगल प्लस नेटवर्क का हिस्सा नहीं होगी। ये सर्विस यूजर्स को फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स की तरह फोटो शेयर करने की सुविधा देगी। गूगल अपने सर्च इंजन, यूटिलिटी प्रोडक्ट्स, इंटरनेट सर्विसेज और गैजेट्स के साथ-साथ अपने ऑफिस के लिए भी फेमस है। गूगल के बारे में कई ऐसे फैक्ट्स हैं जिन्हें शायद आप ना जानते हों। Dainikbhaskar.com आपको बताने जा रहा है गूगल के बारे में 9 रोचक फैक्ट्स।

1. मिठाइयों के नाम पर क्यों रखे गए एंड्रॉइड के नाम?

एंड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम ने मार्केट में अपनी बादशाहत बना ली है। नंबर वन ऑपरेटिंग सिस्टम होने के साथ-साथ इस ऑपरेटिंग सिस्टम के नाम को लेकर कई लोगों के मन में सवाल उठता होगा कि आखिर इसका नाम मिठाइयों के नाम पर क्यों रखा गया है। गूगल के एक कर्मचारी रैनडल सराफा (Randall Sarafa) के हिसाब से यह टीमवर्क के कारण है। इस बारे में कंपनी ने आधिकारिक खुलासा नहीं किया है। आपको बताते चलें की गूगल के एंड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम को ABCD के अल्फाबेट के हिसाब से नाम दिए गए हैं। Cupcake, Donut, Eclair, Froyo, Gingerbread, Honeycomb, Ice Cream Sandwich, Jelly Bean, KitKat और हालिया Lollipop.




2. गूगल डूडल 
गूगल का पहला डूडल 'बर्निंग मैन फेस्टिवल' पर 1998 में बनाया गया था। इसमें गूगल का सर्च पेज बदल दिया गया था।

मई 2012 में गूगल ने अपने डूडल को नया रूप दिया। यह एक गेम के रूप में था, ऐसा पहली बार हुआ था की यूजर गूगल डूडल के साथ खेल सकता था। यह गेम Pac-Man वीडियो गेम के 30 साल पूरे होने की खुशी में बनाया गया था। 
इसी साल गूगल ने अपना पहला एनिमेटेड (कार्टून) डूडल अपडेट किया था। यह जॉन लेनन के 70 वें जन्मदिन के कारण बनाया गया था।






3. पेज और ब्रिन बेचना चाहते थे गूगल को

शुरुआती दौर में गूगल के संस्थापक सर्जी ब्रिन और लैरी पेज गूगल को बेचने के लिए एक्साइट कंपनी के CEO के पास गए थे। यह दोनों गूगल कंपनी को 1 मिलियन डॉलर में बेचना चाहते थे। एक्साइट कंपनी की तरफ से गूगल को सिर्फ 750000 डॉलर ही ऑफर किए गए। उस समय ये सौदा नहीं हो पाया और गूगल ने बाद में इतना विशाल रूप ले लिया।







4. गूगल के बावर्ची के पास थी 150 लोगों की टीम

गूगल की तरफ से नवंबर 1999 में एक शेफ रखा गया। चार्ली अइयर्स (Charlie Ayers) को शुरुआती दौर में 40 कर्मचारियों का खाना बनाना होता था। उनके काम को मीडिया में काफी सराहा गया। 2006 में चार्ली ने गूगल को छोड़ा इस समय तक गूगल के इस मास्टर शेफ के पास टीम में 4 खास शेफ और 150 लोगों की टीम बन चुकी थी। यह टीम एक दिन में 4000 लंच और डिनर परोसा करती है।







5. गूगल और कंपनियां

गूगल के बारे में एक और रोचक बात यह है कि 2010 से गूगल ने लगभग हर हफ्ते एक नई कंपनी में निवेश किया है। 2010 में गूगल एनर्जी के साथ गूगल ने अपना पहला निवेश शुरू किया। इसके बाद 'नेक्स्ट एरा एनर्जी रिसोर्स' में दूसरी बार इंवेस्ट किया। इसी साल 'ग्लोबल आईपी सॉल्यूशन' और ऐसी ही कई कंपनियों को गूगल ने अपने साथ मिला लिया। इसके बाद एंड्रॉइड, मोटोरोला, क्विकऑफिस जैसी कई कंपनियों को गूगल ने अपने साथ मिला लिया। हालांकि, अब मोटोरोला कंपनी को लेनोवो ने खरीद लिया है। 2013 तक गूगल ने 125 कंपनियां खरीद ली थीं।






6. गलती से पड़ गया गूगल का नाम
गूगल सर्च इंजन के नाम की स्पेलिंग उसके संस्थापकों द्वारा की गई गलती के कारण GOOGLE लिखी गई। इसका नाम लिखते समय गलती से GOOGLE लिख दिया गया। इस कंपनी को असल में GOOGOL नाम दिया जाना था।



7. गूगल की पहली ट्वीट
बहुत कम लोग यह जानते हैं कि गूगल ने अपनी पहली ट्वीट कम्प्यूटर की भाषा जिसमें 0 और 1 का इस्तेमाल किया जाता है -'बाइनरी (Binary)' में की थी। 
यह ट्वीट थी-

“I’m 01100110 01100101 01100101 01101100 01101001 01101110 01100111 00100000 01101100 01110101 01100011 01101011 01111001 00001010.”

अंग्रेजी में इसका मतलब है ' im feeling lucky' गूगल के सर्च बटन के बगल में आपको यही शब्द लिखे मिलेंगे। इसपर क्लिक करते ही आप अब तक के सभी गूगल डूडल के बारे में जानकारी ले सकते हैं।





8. Gmail
गूगल की ई-मेल सर्विस GMAIL 16 दिसंबर 2005 में लॉन्च की गई थी। इस सर्विस को 50 अलग-अलग भाषाओं में लॉन्च किया गया। GMAIL का आइडिया राजन सेठ ने दिया था जब वो गूगल में इंटरव्यू देने के लिए गए थे। इस आइडिया को बाद में पॉल बुचे (Paul Buchhe) ने असली आकार दिया। शुरुआती दौर में GMAIL को सिर्फ गूगल कंपनी के कर्मचारियों के लिए बनाया गया था। अप्रैल 1, 2004 को इसे आधिकारिक तौर पर दुनिया भर के यूजर्स के लिए शुरू करने की घोषणा की गई।





9. बीच में नहीं था गूगल का लोगो
अगर सर्च इंजन के डिजाइन की बात करें तो गूगल का सर्च इंजन सबसे आकर्षक लगेगा। बीच में गूगल का सर्च बार और ऊपर लिखा हुआ गूगल। शुरुआती समय में गूगल का लोगो स्क्रीन पर लेफ्ट साइड था। गूगल का सर्च पेज 31 मार्च, 2001 में बदला गया था।



http://www.bhaskar.com/news/GAD-SPE-some-interesting-facts-about-google-5003217-PHO.html?seq=1

Monday, October 20, 2014

इस तरह प्रकट हुआ था वृंदावन के बांके बिहारी जी का विग्रह


वृंदावन में बांके बिहारी जी का एक भव्य मंदिर है। इस मंदिर में बिहारी जी की काले रंग की एक प्रतिमा है। इस प्रतिमा के विषय में मान्यता है कि इस प्रतिमा में साक्षात् श्री कृष्ण और राधा समाए हुए हैं। इसलिए इनके दर्शन मात्र से राधा कृष्ण के दर्शन का फल मिल जाता है।


इस प्रतिमा के प्रकट होने की कथा और लीला बड़ी ही रोचक और अद्भुत है इसलिए हर साल मार्गशीर्ष मास की पंचमी तिथि को बांके बिहारी मंदिर में बांके बिहारी प्रकटोत्सव मनाया जाता है। यह तिथि इस वर्ष 7 दिसंबर को है।



बांके बिहारी के प्रकट होने की कथा


 संगीत सम्राट तानसेन के गुरू स्वामी हरिदास जी भगवान श्री कृष्ण के अनन्य भक्त थे। इन्होंने अपने संगीत को भगवान को समर्पित कर दिया था। वृंदावन में स्थित श्री कृष्ण की रासस्थली निधिवन में बैठकर भगवान को अपने संगीत से रिझाया करते थे।


भगवान की भक्त में डूबकर हरिदास जी जब भी गाने बैठते तो प्रभु में ही लीन हो जाते। इनकी भक्ति और गायन से रिझकर भगवान श्री कृष्ण इनके सामने आ जाते। हरिदास जी मंत्रमुग्ध होकर श्री कृष्ण को दुलार करने लगते। एक दिन इनके एक शिष्य ने कहा कि आप अकेले ही श्री कृष्ण का दर्शन लाभ पाते हैं, हमें भी सांवरे सलोने का दर्शन करवाएं।



इसके बाद हरिदास जी श्री कृष्ण की भक्ति में डूबकर भजन गाने लगे। राधा कृष्ण की युगल जोड़ी प्रकट हुई और अचानक हरिदास के स्वर में बदलाव आ गया और गाने लगे- 



'भाई री सहज जोरी प्रकट भई, जुरंग की गौर स्याम घन दामिनी जैसे। प्रथम है हुती अब हूं आगे हूं रहि है न टरि है तैसे।। अंग अंग की उजकाई सुघराई चतुराई सुंदरता ऐसे। श्री हरिदास के स्वामी श्यामा पुंज बिहारी सम वैसे वैसे।।'



श्री कृष्ण और राधा ने हरिदास के पास रहने की इच्छा प्रकट की। हरिदास जी ने कृष्ण से कहा कि प्रभु मैं तो संत हूं। आपको लंगोट पहना दूंगा लेकिन माता को नित्य आभूषण कहां से लाकर दूंगा। भक्त की बात सुनकर श्री कृष्ण मुस्कुराए और राधा कृष्ण की युगल जोड़ी एकाकार होकर एक विग्रह रूप में प्रकट हुई। हरिदास जी ने इस विग्रह को बांके बिहारी नाम दिया।


जब गवाही देने अदालत पहुंचे बांके बिहारी


कृष्णभक्तों में खासतौर पर बिहारीजी के भक्तों में एक कथा प्रचलित है। एक गरीब ब्राह्मण बांके बिहारी का भक्त था। एक बार उसने किसी महाजन से कुछ रुपये उधार लिए। हर महीने वह थोड़ा-थोड़ा करके कर्ज चुकाया। आखिरी किस्त के पहले महाजन ने उसे अदालती नोटिस भिजवा दिया कि उधार बकाया है और पूरी रकम व्याज सहित वापस करे।

ब्राह्मण परेशान हो गया। महाजन के पास जा कर उसने बहुत सफाई दी पर कोई असर नहीं हुआ। मामला कोर्ट में पहुंचा। कोर्ट में भी ब्राह्मण ने जज से वही बात कही, मैंने सारा पैसा चुका दिया है। जज ने पूछा, कोई गवाह है जिसके सामने तुम महाजन को पैसा देते थे। कुछ सोचकर उसने बिहारीजी मंदिर का पता बता दिया।

अदालत ने मंदिर का पता नोट करा दिया। अदालत की ओर से मंदिर के पते पर सम्मन जारी कर दिया गया। वह नोटिस बिहारीजी के सामने रख दिया गया। बात आई गई हो गई। गवाही के दिन एक बूढ़ा आदमी जज के सामने गवाह के तौर पर पेश हुआ। उसने कहा कि पैसे देते समय मैं साथ होता था और इस-इस तारीख को रकम वापस की गई थी।

जन्माष्टमी विशेषः राधा कृष्ण के मिलन की अद्भुत कहानियां


जज ने सेठ का बही- खाता देखा तो गवाही सही निकली। रकम दर्ज थी, नाम फर्जी डाला गया था। जज ने ब्राह्मण को निर्दोष करार दिया। लेकिन उसके मन में यह उथल पुथल मची रही कि आखिर वह गवाह था कौन। उसने ब्राह्मण से पूछा। ब्राह्मण ने बताया कि बिहारीजी के सिवा कौन हो सकता है।

इस घटना ने जज को इतना विभोर कर दिया किया कि वह इस्तीफा देकर, घर-परिवार छोड़कर फकीर बन गया। कहते है कि वही न्यायाधीश बहुत साल बाद पागल बाबा के नाम से वृंदावन लौट कर आया।


वापस गोकुल चल मथुराराज...

वृंदावन। क्या कभी ऐसा भी हो सकता है, जहां भगवान भक्तों की भक्ति से अभिभूत होकर या उनकी व्यथा से द्रवित हो भक्तों के साथ ही चल दें? वृदांवन का मशहूर बांके बिहारी मंदिर एक ऐसा ही मंदिर माना जाता है, जिसके बारे में कहा जाता है कि बांके बिहारी जी भक्तों की भक्ति से इतना प्रभावित हो जाते हैं कि मंदिर में अपने आसन से उठकर भक्तों के साथ हो लेते हैं, इसीलिए मंदिर में उन्हें परदे में रखकर उनकी क्षणिक झलक ही भक्तों को दिखाई जाती है। 
WD


पुजारियों का एक समूह दर्शन के वक्त लगातार मूर्ति के सामने पड़े पर्दे को खींचता-गिराता रहता है और उनकी एक झलक पाने को बेताब श्रद्धालु दर्शन करते रहते हैं और बांके बिहारी हैं, जो अपनी एक झलक दिखाकर पर्दे में जा छिपतें हैं। लोक कथाओं के अनुसार कई बार बांके बिहारी कृष्णऐसा कर भी चुके हैं, मंदिर से गायब हो चुके हैं, इसीलिए ये पर्देदारी की जाती है।

एक शृद्धालु के अनुसार' मंदिर मे दर्शनार्थ आए श्रद्धालु बार-बार उनकी झलक पाना चाहते हैं लेकिन पलक झपकते ही वो अंतर्ध्यान हो जाते हैं। उनके पास खड़े एक श्रद्धालु बताते हैं कि ऐसे ही हैं हमारे बांके बिहारी... सबसे अलग, सबसे अनूठे। 

ये पर्दा डाला ही है इसलिए कि भक्त बिहारी जी से ज़्यादा देर तक आँखे चार न कर सकें क्योंकि कोमल हृदय बिहारी जी भक्तों की भक्ति व उनकी व्यथा से इतना द्रवित हो जाते हैं कि मंदिर मे अपने आसन से उठकर भक्तों के साथ हो लेते हैं। वो कई बार ऐसा कर चुके हैं, इसलिए अब ये पर्दा डाल दिया गया है ताकि वे टिककर बैठे उनका भोला सा स्पष्टीकरण है 'अगर ये एक भक्त के साथ चल दिए तो बाकियों का क्या होगा?'

विस्मित से भक्त बता रहे हैं, एक बार राजस्थान की एक राजकुमारी बांके बिहारी जी के दर्शनार्थ आईं लेकिन वो इनकी भक्ति में इतनी डूब गई कि वापस जाना ही नहीं चाहती थीं। परेशान घरवाले जब उन्हें जबरन घर साथ ले जाने लगे तो उसकी भक्ति या कहें व्यथा से द्रवित होकर बांके बिहारी जी भी उसके साथ चल दिए। 

इधर मंदिर में बांके बिहारी जी के गायब होने से भक्त बहुत दु:खी थे। आखिरकार समझा बुझाकर उन्हें वापस लाया गया। भक्त बताते हैं कि उन पर यह पर्दा तभी से डाल दिया गया, ताकि बिहारी जी फिर कभी किसी भक्त के साथ उठकर नहीं चल दें और भक्त उनके क्षणिक दर्शन ही कर पाएं, सिर्फ झलक ही देख पाएं।

यह भी कहा जाता है कि उन्हें बुरी नजर से बचाने के लिए पर्दा रखा जाता है क्योंकि बाल कृष्ण को कहीं नजर न लग जाए। बंगाल से आए एक भक्त बताया कि सिर्फ जन्माष्टमी को ही बांके बिहारी जी के रात को महाभिषेक के बाद रात भर भक्तों को दर्शन देते हैं और तड़के ही आरती के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।

वैसे मथुरा वृंदावन में जन्माष्टमी का उत्सव पर्व से सात आठ दिन पहले ही शुरू हो जाता है। कहा जाता है कि सन 1863 में स्वामी हरिदास को बांके बिहारी जी के दर्शन हुए थे। तब यह प्रतिमा निधिवन में थी, पर गोस्वामियों के एक वर्ष बाद इस मंदिर को बनवाने के बाद इस प्रतिमा को इस मंदिर मे प्रतिष्ठापित किया गया। 

पूरे वृंदावन में कृष्ण लीला का तिलिस्म चप्पे-चप्पे पर बिखरा हुआ है। कृष्ण का अपने भक्तों के साथ जो अनन्य प्रेम है उसको लेकर भी कई कहानियां और कई किस्से हैं...


राजस्थान के एक भक्त बताते है कि यह मंदिर शायद अपनी तरह का पहला मंदिर है, जहाँ सिर्फ इस भावना से कि कहीं बांके बिहारी की नींद मे खलल न पड़ जाए इसलिए सुबह घंटे नही बजाए जाते बल्कि उन्हें हौले-हौले एक बालक की तरह उन्हें दुलार कर उठाया जाता है, इसी तरह संझा आरती के वक्त भी घंटे नहीं बजाए जाते ताकि उनकी शांति में कोई खलल न पड़े।

गुजरात के एक भक्त बताते है 'यह जानकर शायद आप हैरान हो जाएंगे कि बांके बिहारी जी आधी रात को गोपियों के संग रासलीला करने निधिवन में जाते हैं और तड़के चार बजे वापस लौट आते हैं।' 

विस्फरित नेत्रों से अपनी व्याख्या को वे और आगे बढ़ाते हुए बताते हैं 'ठाकुर जी का पंखा झलते-झलते एक सेवक की अचानक आँख लग गई, चौंककर देखा तो ठाकुर जी गायब थे पर भोर चार बजे अचानक वापस आ गए। अगले दिन वही सब कुछ दोबारा हुआ तो सेवक ने ठाकुर जी का पीछा किया और ये राज़ खुला कि ठाकुर जी निधिवन में जाते हैं।' तभी से सुबह की मंगल आरती की समय थोड़ा देर से कर दिया, जिससे ठाकुर जी की अधूरी नींद पूरी हो सके।

अकसर भक्तगण कान्हा की बांसुरी की धुन, निधिवन में नृत्य की आवाज़ें आदि के बारे मे किस्से यह कहकर सुनाते हैं कि 'हमे किसी ने बताया है।' ऐसे कितने ही किस्से कहानियां वृंदावन के चप्पे-चप्पे पर बिखरी हुई हैं।'

कितनी ही 'मीराएं' वृंदावन में आपको कृष्ण के सहारे ज़िंदगी की गाड़ी को आगे बढ़ाती हुई नज़र आएंगी। इस जीवन में कृष्ण ही इनके जीवन का सहारा है। 

अचानक मंदिर में भक्तों का हुजम दिखाई देता है...राधे राधे, जय हो बांके बिहारी के जयघोष के बीच, मंदिर के प्रांगण के एक कोने से, मद्धम से स्वर में भजन सुनाई देता है... हमसे परदा करो न हे मुरारी, वृदांवन के हो बांके बिहारी...।

चांदी से बाल, सफेद धोती दमकते, माथे पर चंदन का टीका, आंखों से बरसते आंसुओं के बीच मूर्तिस्थल की तरफ लगातार देखती हुई बहुत धीमी आवाज़ में भजन गाती एक ऐसी ही एक मीरा...हमसे परदा करो न हे मुरारी, वृदांवन के हो बांके बिहारी...

साध्वी पर्दे के पीछे की बांके बिहारी जी की इसी लुका-छिपी से व्यथित होकर ही सम्भवत: बरसती आंखों से गुहार कर रही थीं। बांके बिहारी की एक झलक दर्शन के बाद मंदिर से वापसी... मंदिर के बाहर निकलते ही संकरी सी गली में बनी किसी दुकान पर शुभा मुदगल की आवाज़ में गाया गया गीत माहौल मे एक अजीब सी शांति और अजीब सी बेचैनी बिखेर रहा है... 'वापस गोकुल चल मथुराराज...., राजकाज मन न लगाओ, मथुरा नगरपति काहे तुम गोकुल जाओ?'.. शृद्धालुयों के हुजूम तेज़ी से मंदिर की ओर बढ़ रहे हैं..


बांके बिहारी मंदिर में इसी विग्रह के दर्शन होते हैं। बांके बिहारी के विग्रह में राधा कृष्ण दोनों ही समाए हुए हैं। जो भी श्री कृष्ण के इस विग्रह का दर्शन करता है उसकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। भगवान श्री कृष्ण अपने भक्त के कष्टों दूर कर देते हैं।